Sunday, 1 July 2018

सिहों के लेहँड़ नहीं









ऐसे ही लोगों के लिए संत कबीर ने कहा था


'सिहों के लेहँड़ नहीं, हंसों की नहीं पाँत ।
लालों की नहि बोरियाँ, साध न चलैं जमात |'